आदित्य विक्रम बिरला

Aditya Vikram Birla Biography in Hindi
aditya
स्रोत: www.adityabirla.com

जन्म: 14 नवंबर 1943, कोलकाता, पश्चिम बंगाल

व्यवसाय/पद: आदित्य बिड़ला ग्रुप के पूर्व अध्यक्ष

जीडी बिरला के पोते आदित्य विक्रम बिरला एक प्रसिद्द भारतीय उद्योगपति थे| उनका नाम भारत के सबसे प्रेरणादायक और सफल उद्योगपतियों में गिना जाता है। उनके नवीन विचारों ने दूसरे देशों के साथ व्यापार का विस्तार करने में मदद की और भारतीय कॉर्पोरेट परिदृश्य पर एक अमिट छाप छोड़ा। वे बहुराष्ट्रीय साम्राज्य स्थापित करने वाले कुछ भारतीय उद्योगपतियों में से एक थे| अपने दादाजी के विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने ‘सस्टेनेबल लाइवलीहुड’ अवधारणा की शुरुआत की| इस अवधारणा से वह न केवल जनता के बीच प्रसिद्द हुए बल्कि अन्य व्यवसायियों को भी प्रेरित किया। उन्होंने अपने आधुनिक, पेशेवर, और अग्रगामी विचारों से अपने व्यवसाय को न केवल भारत भर में बल्कि विदेशों में भी बढ़ाया और अपने शानदार और अभूतपूर्व प्रयासों से वह भारतीय उद्योग का नया चेहरा बन गए।

प्रारंभिक जीवन

Story of Jawaharlal Nehru

आदित्य विक्रम बिरला का जन्म 14 नवंबर 1943 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में उद्योगपति बसंत कुमार बिड़ला और सरला बिड़ला के घर हुआ। वे उद्योगपति जीडी बिरला के पोते थे| जीडी बिरला प्रसिद्द ‘बिरला समूह’ के संस्थापक थे| उनका महात्मा गाँधी से मधुर सम्बन्ध था और उन्होंने प्रसिद्द ‘अम्बेसडर कार’ बनाकर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया| आदित्य ने कोलकाता से अपनी औपचारिक शिक्षा प्राप्त की और फिर सेंट जेवियर्स कॉलेज से विज्ञान में स्नातक किया। इसके बाद वे ‘मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ से कैमिकल इंजीनियरिंग में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अमेरिका चले गए।

कैरियर

‘मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ से कैमिकल इंजीनियरिंग करने के बाद आदित्य भारत लौटे और अपने खानदानी व्यवसाय में शामिल हो गए| सिर्फ इतने से ही संतुष्ट नहीं होने वाले आदित्य ने ‘ईस्टर्न एक्सप्रेस मिल्स’ से कपड़े का व्यापार शुरू किया जो कोलकाता में बहुत सफल रहा| इस सफल प्रयोग से उन्होंने परिवार के डूबते हुए कपड़े के व्यापार में नयी जान डालकर पुनः जीवित कर दिया| यह तो महज शुरुआत थी; इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक, हर व्यवसाय में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किया| उनकी अगली सबसे बड़ी चुनती थी ‘आयल सेक्टर’ में बिड़ला ग्रुप का विस्तार और हर बार की भांति इस बार भी आदित्य सफल रहे| यह समय बिड़ला समूह और आदित्य के लिए चुनौती भरा था क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था समाजवादी विचारों से प्रेरित थी और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी लोकलुभावन नीतियों जैसे बैंकों का राष्ट्रीयकरण और प्राइवेट निवेश पर नियंत्रण के जरिये अपनी पकड़ मजबूत कर रही थीं| पश्चिम की ओर बढ़ने के बजाय, आदित्य ने पूर्व पर ध्यान केंद्रित किया और उनके ग्रुप की पहली विदेशी कंपनी – ‘इंडो-थाई सिंथेटिक्स कंपनी लिमिटेड’ की स्थापना वर्ष 1969 में थाईलैंड में हुई।

‘इंडो-थाई सिंथेटिक्स कंपनी लिमिटेड’ की सफलता के बाद, आदित्य ने 1973 में स्पन यार्न के निर्माण के लिए ‘पीटी एलिगेंट टेक्सटाइल’ की स्थापना की। इस देश में कंपनी का यह पहला उद्यम था| वर्ष 1974 में उन्होंने ग्रुप के ‘विस्कोस रेयान स्टेपल फाइबर’ को थाईलैंड में ‘थाई रेयान’ के रूप में स्थापित किया| वर्ष 1975 में स्पन यार्न का उत्पादन करने के लिए पहले भारत-फिलिपिनो जॉइंट वेंचर की स्थापना फिलीपींस के फिल समूह के साथ किया गया। अगले कुछ सालों में आदित्य ने दक्षिण पूर्व एशिया में कई कंपनियां और संयुक्त-उपक्रम प्रारंभ किये| सन 1977 में उन्होंने मलेशिया में ‘पैन सेंचुरी एडिबल ऑयल्स’ की स्थापना की जो बाद में दुनिया का सबसे बड़ा एकल स्थान पाम आयल रिफाइनरी बन गया| वर्ष 1978 में उन्होंने ने समूह के पहले ‘कार्बन ब्लैक’ कंपनी की स्थापना थाईलैंड और 1982 में ‘पीटी इंडो भारत रेयान’ की स्थापना इंडोनेशिया में की| इन सब गतिविधियों ने बिड़ला समूह को एक ब्लू चिप कंपनी बना दिया| बिड़ला समूह अब भारत के शीर्ष उद्योग घरानों में शामिल हो गया और आदित्य बिड़ला की गिनती बड़े उद्योगपतियों में की जाने लगी| विदेशों में संयुक्त उपक्रमों से भारी मुनाफे के साथ बिड़ला समूह के एक निवासी भारतीय उद्योगपति द्वारा स्थापित सबसे बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी बन गई। 1980 के दशक तक आदित्य ने दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया और मध्य पूर्व में लगभग 19 कंपनियों की स्थापना की थी।

भारत के विकास में योगदान

यह आदित्य बिरला के गतिशील और प्रभावशाली नेतृत्व का ही परिणाम था कि बिड़ला समूह महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति तेज़ी के साथ दर्ज कराने में सफल रहा| जब वैश्वीकरण की संकल्पना भारत से कोसों दूर थी उस समय आदित्य बिड़ला ने दूसरे देशों में अपने व्यवसाय को सफलता पूर्वक फैलाया| उनके नेतृत्व में बिड़ला समूह की कंपनिया कपड़ा, सीमेंट, एल्युमीनियम, रसायन, उर्वरक, फाइबर, वित्तीय सेवाओं, स्पंज आयरन, सॉफ्टवेयर, और पेट्रो रिफाइनरी जसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में अपार लाभ कमा रही थीं| आदित्य को देश के कमोडिटी व्यापार को बढ़ाने और सुधारने का भी श्रेय जाता है| ग्रासिम, हिंडाल्को, भारतीय रेयान, और इंडो गल्फ फर्टिलाइजर्स को शानदार सफलता दिलाकर उन्होंने कई कंपनियों के समृधि में मदद की।

हालाँकि उनके समूह के कंपनियों में लगभग 70000 कर्मचारी थे परन्तु वास्तव में 2 लाख से ज्यादा लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा था| भारत में सबसे बड़ा औद्योगिक साम्राज्य को नई उंचाईयों तक पहुँचाने के अलावा, आदित्य बिड़ला ने भारतीय रिजर्व बैंक, एयर इंडिया और भारत फंड के निदेशक के रूप में कार्य किया। वह एलके झा के नेतृत्व में जापान के लिए आर्थिक और व्यापार मिशन के एक सदस्य भी रहे|

वर्ष 1992 में भारतीय वित्त मंत्री के नेतृत्व में व्यापार मिशन का भी वह सदस्य थे| वो इंडस्ट्रियल क्रेडिट एंड इंडस्ट्रियल कारपोरेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड और बजाज ऑटो जैसे कंपनियों के बोर्ड पर एक निर्देशक भी रहे।

व्यक्तिगत जीवन

आदित्य विक्रम बिरला का विवाह राजश्री से हुआ था। दंपती के दो बच्चे थे, बेटी वासवदत्ता (कुशाग्र नयन बजाज से विवाहित), और बेटे कुमार मंगलम (आदित्य बिड़ला समूह के वर्तमान अध्यक्ष)|

मृत्यु

आदित्य बिड़ला को 1993 में प्रोस्टेट कैंसर का पता चला जिसके बाद उन्होंने बिड़ला ग्रुप की जिम्मेदारियों को अपनी पत्नी और बेटे के हाथों में हस्तांतरित कर दिया। इलाज के लिए उन्हें बाल्टीमोर में जॉन हॉपकिंस अस्पताल, मैरीलैंड, अमेरिका, में भर्ती कराया मगर चार महीने के संघर्ष के बाद  51 साल की उम्र में, 1 अक्टूबर, 1995 को उनका निधन हो गया| बिड़ला समूह का सारा दारोमदार उनके युवा बेटे कुमार मंगलम के ऊपर आ गया।

सम्मान और पुरस्कार

1978: बंबई महानगर जेसीज  द्वारा उत्कृष्ट युवा व्यक्ति अवार्ड

1984: उत्तर बंबई जेसीज द्वारा उत्कृष्ट नागरिक पुरस्कार

1985: अमरावती चैम्बर् ऑफ़ कॉमर्स द्वारा ‘मैन ऑफ़ द इयर’ पुरस्कार

1986: व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में जाएंट इंटरनेशनल अवार्ड , के दायर में विशालकाय अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार

1990: मद्रास मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा बिजनेस लीडरशिप अवार्ड

1990: बिजनेस इंडिया द्वारा ‘बिज़नसमैन ऑफ़ द इयर’ पुरस्कार

1992: बंबई मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा ‘मैनेजमेंट मैन ऑफ़ द इयर’ पुरस्कार

1992: एफआईई फाउंडेशन द्वारा राष्ट्र भूषण पुरस्कार

1994: कलकत्ता के रोटरी क्लब द्वारा उद्योग जगत में योगदान के लिए प्लेटिनम जुबली रोटरी पुरस्कार

1995: रोटरी इंटरनेशनल द्वारा वोकेशनल उत्कृष्टता पुरस्कार

1996: आल इंडिया एसोसिएशन ऑफ़ इंडस्ट्रीज द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार

1996: ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा भारतीय सीमेंट उद्योग के विकास में उल्लेखनीय योगदान के लिए पुरस्कार

लायंस क्लब इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा ‘डेडिकेटेड ह्यूमन सर्विसेज’ के लिए मेल्विन जोन्स फैलो अवार्ड रोटरी इंटरनेशनल के रोटरी फाउंडेशन द्वारा पॉल हैरिस फैलो अवार्ड

टाइमलाइन (जीवन घटनाक्रम)

1943: कोलकाता, पश्चिम बंगाल में जन्म

1965: मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढाई कर भारत लौटे

1965: कोलकाता में शुरू पूर्वी स्पिनिंग मिल्स की स्थापना की

1969: थाईलैंड में इंडो-थाई सिंथेटिक्स कंपनी लिमिटेड की स्थापना

1973: इंडोनेशिया में पीटी सुरुचिपूर्ण वस्त्र स्थापित

1974: थाई रेयन थाईलैंड में स्तापित

1975: फिलीपींस में इंडो फिल ग्रुप ऑफ़ कम्पनीज शुरू

1977: मलेशिया में दुनिया का सबसे बड़ा एकल स्थान पाम आयल रिफाइनरी स्थापित, पान सदी खाद्य तेलों

1978: थाईलैंड में थाई कार्बन ब्लैक स्थापित

1982: पीटी इंडो भारत रेयन इंडोनेशिया में शुरू

1985:  अमरावती चैंबर ऑफ़ कॉमर्स द्वारा मैन ऑफ़ द इयर पुरस्कार के मैन पर प्रदत्त

1990: बिजनेस इंडिया द्वारा बिजनेसमैन ऑफ़ द इयर पुरस्कार से सम्मानित

1995: बाल्टीमोर, संयुक्त राज्य अमेरिका, में प्रोस्टेट कैंसर से 51 वर्ष की आयु  में 1 अक्टूबर को निधन हो गया

1996: आल इंडिया एसोसिएशन ऑफ़ इंडस्ट्रीज द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित

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