इन्द्र कुमार गुजराल

Inder Kumar Gujral Biography in Hindi
इन्द्र कुमार गुजराल
स्रोत: http://www.bbc.com/news/world-asia-india-20506885

जन्मः 4 दिसंबर 1919, पंजाब के झेलम में (अब पाकिस्तान में )

मृत्युः 30 नवंबर 2012

कार्य क्षेत्र: राजनेता, भारत के 12वें प्रधानमंत्री, पूर्व वित्त मंत्री, पूर्व विदेश मंत्री

इन्द्र कुमार गुजराल भारत के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ और पूर्व प्रधानमंत्री थे। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वह राजनीति के क्षेत्र में आए थे। वे पहले कम्यूनिस्ट पार्टी में शामिल हुए और फिर भारत-पाक युद्ध के बाद कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। उनका प्रशासनिक कौशल प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देखा और उन्हें विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी। 1975 में जब देश अस्थिरता के दौर से गुजर रहा था तब उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्री का पद दिया गया। राजनीतिज्ञ के अलावा वह एक समाजवादी, लेखक और विभिन्न खेलों के प्रशंषक भी थे। वह उर्दू के सराहनीय शायर और विदेश नीति के विशेषग्य भी थे और इस विषय पर कई पुस्तकें भी लिखीं।

Story of Bhagat Singh

शुरुआती जीवन

इंद्र कुमार गुजराल का जन्म 4 दिसंबर 1919 को झेलम के एक कस्बे में हुआ था। यह स्थान पहले अविभाजित पंजाब के अंतर्गत आता था, लेकिन वर्तमान में पाकिस्तान में है। वह अवतार निरंजन गुजराल और पुष्पा गुजराल के बड़े पुत्र थे। उनका जन्म स्वतंत्रा सेनानियों के परिवार में हुआ था और उनके अभिभावकों ने पंजाब में स्वतंत्रता की लड़ाई में सक्रियता से भाग लिया था। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 1942 में उन्हें जेल जाना पड़ा। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा कस्बे से ही पूरी की। आगे की पढ़ाई फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज और कॉलेज की पढ़ाई हैली कॉलेज ऑफ कॉमर्स से पूरी की। 26 मई 1945 को लाहौर में उन्होंने अपनी कॉलेज मित्र और कवि शीला भसीन से शादी कर ली। विशाल गुजराल और नरेश गुजराल उनके दो पुत्र हैं।

कॅरिअर

उन्होंने राजनीतिक जीवन की शुरुआत अपने कॉलेज के दिनों से की। वह लाहौर छात्रसंघ के सदस्य थे और संघ के अध्यक्ष भी बने। इसके साथ ही वह कम्यूनिस्ट पार्टी का हिस्सा बन गए। अपनी बेसिक शिक्षा पूरी करने तक वह कम्यूनिस्ट पार्टी कार्ड धारी सदस्य बन गए थे। 1976-1980 तक उन्होंने यूएसएसएसआर भारत के राजदूत के तौर पर सेवाएं दीं। 1980 में गुजराल कांग्रेस पार्टी छोड़कर जनता दल में शामिल हो गए। वीपी सिंह के कार्यकाल में वह 1989-1990 तक विदेश मंत्री बने। इसके बाद 1996 में एचडी देवगोड़ा सरकार में यही जिम्मेदारी फिर निभाई। इस दौरान भारत ने पड़ोसी देशों के साथ अपने रिश्ते बेहतर करने का प्रयास किया। इसके अलावा गुजराल को इंडियन काउंसिल ऑफ साउथ एशियन को-ऑपरेशन का अध्यक्ष भी बनाया गया तथा 1996 में राज्यसभा के नेता बने। 21 अप्रैल 1997 को आई के गुजराल ने देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला, लेकिन उनका कार्यकाल महज 11 महीनों का रहा। 1999 में चुनाव के लिए नामांकित नहीं हुए और इस तरह उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया। देश के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के अलावा 1967-1976 तक उन्होंने संचार व संसदीय मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री तथा कार्य व आवास मंत्री के तौर पर अपनी सेवाएं दीं। एक राजनेता के अलावा वह रोटरी क्लब, नई दिल्ली के अध्यक्ष भी रहे। 1960 में उन्हें एशियन रोटरी कांफ्रेंस का को-चेयरमैन बनाया गया और 1991 में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली के संस्थापक सदस्य बने। उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी भाग लिया तथा नारी निकेतन ट्रस्ट के अध्यक्ष, लोक कल्याण समिति के उपाध्यक्ष तथा दिल्ली आर्ट थिएटर के संस्थापक अध्यक्ष भी थे। साथ ही वह एएन गुजराल मेमोरियल स्कूल, जालंधर, पंजाब के अध्यक्ष भी थे।

योगदान

आईके गुजराल ‘गुजराल डॉक्ट्रिन’ पुस्तिका के लेखक थे।  इसमें उन्होंने भारत के पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते बरकरार रखने के आधारभूत सिद्धांत दिए गए हैं।  यह पुस्तक भारत के पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण रिश्तों की अहमियत पर बल देती है। उनके कार्य को विश्व के नेताओं से बहुत सम्मान मिला। ये पांच सिद्धांत हैं, 1- बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों से भारत पारस्परिकता की अपेक्षा नहीं रखता बल्कि आश्रय और मदद करता है जिससे परस्पर विश्वास बढ़ सकता है। 2- कोई दक्षिण एशियाई देश अपनी भूमि का इस्तेमाल क्षेत्र के अन्य देश के खिलाफ नहीं करेगा न होने देगा। 3- कोई भी देश एक दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे। 4- सभी दक्षिण एशियाई देश एक दूसरे की अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करें। 5- उन्हें अपने सभी विवादास्पद मुद्दों का हल विचार विमर्श तथा बातचीत से निकालना चाहिए।

टाइम लाइन (जीवन घटनाक्रम)

1919:  झेलम में जन्म हुआ (अब यह स्थान पाकिस्तान में है)

1931: स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। 1942: भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जेल गए।

1945: शीला भसीन से विवाह किया।

1959-64:  नई दिल्ली नगर निगम के उपाध्यक्ष बने।

1960: रोटरी क्लब नई दिल्ली के अध्यक्ष बने।

1961: एशियन रोटरी कांफ्रेंस के को-चेयरमैन बने।

1964-76: राज्यसभा सदस्य बने (दो बार)

1967-69:  केंद्रीय संसदीय मामले व संचार मंत्री बने

1969-71: सूचना प्रसारण एवं संचार केंद्रीय बने

1971-72:  वर्क्स, हाउसिंग व शहरी विकास केंद्रीय बने।

1972-75: सूचना एवं प्रसारण संचार केंद्रीय मंत्री बने

1975-76:  राज्य और योजना केंद्रीय मंत्री बने।

1976-80:  यूएसएसआर के लिए भारत के राजदूत बने।

1989:  9वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए।

1989-90:  विदेशमंत्री बने।

1992-98:  राज्यसभा सदस्य बने (तीसरी बार)

1993-96: वाणिज्य व टेक्सटाइल समिति के अध्यक्ष बने

1996-97: विदेश मंत्री बने।

1996 (जून): जलसंसाधन केंद्रीय मंत्री बने।

1997(अप्रैल): भारत के प्रधानमंत्री बने।

1998: 12वीं लोकसभा के लिए दोबारा चुने गए (दूसरी बार)

1999:  सक्रिय राजनीति से संन्यास लिया

2012:  लंबी बीमारी के बाद 30 नवम्बर को निधन हो गया।

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