टीवी मोहनदास पई

T.V. Mohandas Pai Biography in Hindi
T.V._Mohandas_Pai
स्रोत: Kremlin.ru [CC BY 3.0 (http://creativecommons.org/licenses/by/3.0)], via Wikimedia Commons

जन्म:1959

व्यवसाय/कार्य/पद: चार्टर्ड अकाउंटेंट, इनफ़ोसिस के पूर्व सीएफओ, मनिपाल ग्लोबल एजुकेशन के अध्यक्ष

टीवी मोहनदास पई जानी-मानी आइटी कंपनी इनफ़ोसिस के पूर्व सीएफओ और वर्तमान में मनीपाल ग्लोबल एजुकेशन के अध्यक्ष हैं। पेशे से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट, टीवी मोहनदास पई वर्ष 1994 में इनफ़ोसिस में शामिल हुए थे। वो इनफ़ोसिस के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स के सदस्य थे। इसके अलवा वो इनफ़ोसिस के कई और दूसरे विभागों के अध्यक्ष भी थे जिसमे वित्त और मानव संसाधन विभाग प्रमुख थे। वो वर्ष 1994 से 2006 तक मुख्य वित्त अधिकारी रहे और उसके बाद शिक्षा, अनुसन्धान और मानव विकास संसाधन कार्यों की अगुआई की। इन्फोसिस के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) के तौर पर उन्होंने कंपनी को दुनिया के सबसे सम्मानित और लोकप्रिय सॉफ्टवेयर सेवा कंपनी बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कंपनी के लिए भारत की पहली व्यापक रूप से स्पष्ट वित्तीय रणनीति तैयार की। निवेशकों के बीच कंपनी का प्रचार-प्रसार और पारदर्शिता लाने में भी उन्होंने अहम् भूमिका निभाई। उनके निर्देशन में बनी ‘ इंफोसिस वार्षिक रिपोर्ट’ ने लगातार चार्टर्ड एकाउंटेंट्स संस्थान से और लेखाकारों के दक्षिण एशियाई महासंघ से भी सर्वोच्च पुरस्कार प्राप्त किया।

प्रारंभिक जीवन

टीवी मोहनदास पई ने बंगलौर के सेंट जोसेफ कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स से वाणिज्य में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और फिर बंगलौर विश्वविद्यालय से कानून में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। वो इंस्टिट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड एकाउंट्स ऑफ़ इंडिया (आईसीएआ) के सदस्य भी हैं।

कैरियर

टीवी मोहनदास पई ने अपने कैरियर की शुरुआत बैंगलोर स्थित एक ट्रांसपोर्ट कंपनी, ‘प्रकाश रोडलाइन्स’ के साथ की। उसके बाद वो वर्ष1994में इनफ़ोसिस में शामिल हो गए। उनके इनफ़ोसिस में शामिल होने की कहानी बड़ी दिलचस्प है। दरअसल,एक मित्र के कहने पर वो1994में इनफ़ोसिस के एजीएम में भाग लेने पहुँच गए और वहां जाकर कंपनी के उच्च अधिकारियों से कंपनी के बारे में कई सवाल पूछे। इसके बाद इनफ़ोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति ने नंदन निलेकनी को उनसे बात करने के लिए कहा। वो1994में इनफ़ोसिस में शामिल हो गए और लम्बे समय तक बोर्ड के सदस्य रहे। 1994 में वे इन्फोसिस के मुख्य वित्तीय अधिकारी बने और 2006 तक इस पद पर बने रहे। वर्ष 2006 में सीएफओ का पद छोड़कर वो कंपनी के अन्य विभाग जैसे शिक्षा,अनुसन्धान और मानव विकास संसाधन के विकास में लग गए। अमेरिका के NASDAQ पर इनफ़ोसिस की लिस्टिंग में उन्होंने अहम् भूमिका निभाई। दिसंबर 2010 के बाद से उन्होंने पूर्णकालिक अध्यक्ष के रूप में आईसीडीएस लिमिटेड की सेवा की। वो भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा गठित केलकर समिति के सदस्य भी थे। इस समिति को प्रत्यक्ष करों के पुनर्गठन के लिए बनाया गया था। वे SEBI के बोर्ड के सदस्य भी हैं।  17 वर्ष की लम्बी सेवा के बाद वर्ष 2011 में उन्होंने इनफ़ोसिस से त्यागपत्र दे दिया। इन्फोसिस के विकास में उन्होंने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वो केंद्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और व्यवसाय के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। वो शिक्षा का स्तर और कार्य कुशलता बढ़ाने के दिशा में भी कार्य कर रहे हैं। देश में साक्षरता बढ़ाने के दिशा में भी उन्होंने बहुत कार्य किया है। वर्ष 2000 में उन्होंने अक्षय पत्र फाउंडेशन की स्थापना बैंगलोर में की जिसका उद्देश्य स्कूल जाने वाले छात्रों में दोपहर का भोजन उपलब्ध कराना है।

पई अंतर्राष्ट्रीय लेखा मानक समिति फाउंडेशन, जो अंतर्राष्ट्रीय लेखा मानक बोर्ड का पर्यवेक्षण करता है, में एक कोष प्रबंधक भी हैं।

पई CSIR-tech प्राइवेट लिमिटेड के बोर्ड के सदस्य भी हैं। वर्ष 2014 में उन्हें अक्षय पत्र फाउंडेशन’ बोर्ड का अतिरिक्त निदेसक चुना गया।

पुरस्कार और सम्मान

  • टीवी मोहनदास पई को आईएमए इंडिया द्वारा वर्ष 2001 में ‘सीएफओ ऑफ़ द इयर’ के लिए नामांकित किया गया
  • उन्हें फाइनेंस एशिया द्वारा वर्ष 2002 में ‘भारत के सर्वश्रेष्ठ सीएफओ’ का पुरस्कार दिया गया
  • वर्ष 2004 में एशिया मनी द्वारा निर्देशित सर्वेक्षण में उन्हें सर्वश्रेष्ठ प्रबंधित कंपनियों में ‘बेस्ट सीएफओ इन इंडिया’ का सम्मान दिया गया।

टाइमलाइन (जीवन घटनाक्रम)

1959: टीवी मोहनदास पई का जन्म हुआ

1994: इन्फोसिस में शामिल हुए

1996: इन्फोसिस के मुख्य वित्तीय अधिकारी बन गए

2001: सीएफओ ऑफ़ द इयर के लिए नामित किया

2002: फाइनेंस एशिया द्वारा वर्ष 2002 में ‘भारत के सर्वश्रेष्ठ सीएफओ’ का पुरस्कार

2004: एशिया मनी द्वारा ‘बेस्ट सीएफओ इन इंडिया’ का सम्मान

2011: मोहनदास ने इनफ़ोसिस से त्यागपत्र दे दिया